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Showing posts from February, 2024

क्मश

कहते है कि लंका स्वर्ण धातु की थी ,गर्म होकर ज्यादा चमकने लगी |हनुमान इस बात पर हैरान हो गये और रावण तालिया पीट पीट कर हंसी उड़ाने लगा | तभी वहां पहले से  ही उपस्थित शनि महाराज ने अपना करिश्मा दिखाया ,जब नीली आँखों से तेज फूक देने वाली किरने निकली तो लंका जल कर भष्म हो गयी |हनुमान जी का काम शनि महाराज जी ने किया ,इस पर रावण को बहुत हैरानी हुए की ये अचानक कैसे हो गया | रावण का ज्ञान सिमित इसलिए हो गया क्योकि वो प्रत्येक  काम  में अपना ही फायदा ढूंडरहा था| घमंड में चूर था कि सभी ग्रहों को उसने बांध के रखा हुआ है जबकि कोई ग्रह उसका काबू में नहीं था |उसने भोतिक विज्ञानं में लाइट के प्रवर्तन और अपवर्तन का पथ नहीं पढ़ा था |वो इलुजन और दिलुजन के कांसेप्ट से लगता है वाकिब नहीं था| उसे किसी आदमी का मृग बनाना तो आता था परन्तु मृगमरीचिका   के गंभीर तथ्य को नहीं समझ पाया था|| इसका प्रमाण ये है कि वो समझ नहीं सकाकि रोशनी का एक मूलभूत सिधांत हैकि सकल वजूद मोजूद वास्तु की परछाई होती है ,छाया की छाया नहीं होती है |इमेज दो प्रकार की होती है ,VIRTUALIMAGE और REAL IMAGE |रावण को भरम...

हनुमान कौन है

हनुमान कौन है    रामायण के प्रमुख  पात्र हनुमान के बारे में जानना जरुरी है |हनुमान शब्द का संधिच्चेद करे तो मिलेगा ,यस्य हनु अस्ती मानः सः हनुमान |यानि बड़ी थुड़ी वाला | पुराण के अनुसार रूद्र के ग्यारहवा रूप अवतार है हनुमान |पवन पुत्र केसरी नंदन ,का क्या अर्थ है |रूद्र के तेज को पवन देवता अपनी अंजलि में लेकर आये  और केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में ज्योति स्थापना से उतपन्न हुए हनुमान | बच्चपन से ही  शूरवीर, बलशाली ,तेजवानऔर मंगल करण है|बच्चपन में भूख लगी तो सूर्य देवता को फल समझ कर खाने को दोड़ पड़े ,इन्द्र ने प्रहार किया तो ठोड़ी पर चोट लगी और हनु बढ़ गयी ,जिसके कारण हनुमान कहलाये | भक्ति और शक्ति के प्रतीक  है हनुमान | शक्ति के मामले में तो अभिशप्त थे की उनको अपना बल भी याद नहीं रहेगा, कोई याद दिलाएगा तो याद हो पायेगा की वो क्या कर सकते है |वो असीम भक्ति  के आशीर्वाद  के साथ पैदा हुए .वो परम राम भक्त थे |एक तरह से शिव साक्षात् अपने आराध्य श्री हरी विष्णु  की सहायता हेतु हनुमान के रूप में आये थे और वो जीवन पर्यंत सेवक बने रहे |     ...

सरस्वती और लक्ष्मी महत्व

दिनांक 14.01.2024  जय माँ सरस्वती  आज बसंत पंचमी है , बड़ा पवित्र दिन ,माता सरस्वती का पूजन दिवस |कार्तिक माह की अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है ,बसंत पंचमी को माता सरस्वती की | कहते है कि माता सरस्वती और लक्ष्मी दोनों सगी बहने है ,परन्तु कभी साथ साथ नहीं रहती| |जब चलती है तो यह सबसे बड़ी युति मानी जाती है |वैसे तो दोनों ही महलक्ष्मी का रूप है |लक्ष्मी के दो रूप है ,लक्ष्मी और सरस्वती| समझे तो जैसे धन लक्ष्मी ,विद्या लक्ष्मी | सत रूपा लक्ष्मी स्थिर रहती है ,जिस पर प्रसन्न हो जाए तो चिरावाधि तक ठहरती है| लक्ष्मी कृपा से प्राप्त धन राशि को बचाए रखने और उसके सदोपयोग को बनाये रखने के लिए समझदार अकाउंटेंट्स की जरुरत है ,एम् बी ए पास मैनेजर चाहिये |कभी पैसा होता नहीं ,कभी होता है तो उचित उपयोग के अभाव में लुट जाता है| डॉक्टर पैसे के बल पर हॉस्पिटल खोल सकता है मगर असली ज्ञान तत्व वाला ही मरीज को ठीक कर पता है | कोटे से बने इंजिनियरके पुल तो गिरते ही है |अतः लक्ष्मी और सरस्वती का साथ होना बहुत जरुरी है|  ज्ञान का अंतिम लक्ष्य शांति की तलाश होना चाहिये | यदि ज्ञान...