क्मश

कहते है कि लंका स्वर्ण धातु की थी ,गर्म होकर ज्यादा चमकने लगी |हनुमान इस बात पर हैरान हो गये और रावण तालिया पीट पीट कर हंसी उड़ाने लगा | तभी वहां पहले से  ही उपस्थित शनि महाराज ने अपना करिश्मा दिखाया ,जब नीली आँखों से तेज फूक देने वाली किरने निकली तो लंका जल कर भष्म हो गयी |हनुमान जी का काम शनि महाराज जी ने किया ,इस पर रावण को बहुत हैरानी हुए की ये अचानक कैसे हो गया | रावण का ज्ञान सिमित इसलिए हो गया क्योकि वो प्रत्येक  काम  में अपना ही फायदा ढूंडरहा था| घमंड में चूर था कि सभी ग्रहों को उसने बांध के रखा हुआ है जबकि कोई ग्रह उसका काबू में नहीं था |उसने भोतिक विज्ञानं में लाइट के प्रवर्तन और अपवर्तन का पथ नहीं पढ़ा था |वो इलुजन और दिलुजन के कांसेप्ट से लगता है वाकिब नहीं था| उसे किसी आदमी का मृग बनाना तो आता था परन्तु मृगमरीचिका   के गंभीर तथ्य को नहीं समझ पाया था|| इसका प्रमाण ये है कि वो समझ नहीं सकाकि रोशनी का एक मूलभूत सिधांत हैकि सकल वजूद मोजूद वास्तु की परछाई होती है ,छाया की छाया नहीं होती है |इमेज दो प्रकार की होती है ,VIRTUALIMAGE और REAL IMAGE |रावण को भरम था की शनि को कुए मेंबांध कर रखा है ,जबकि ऐसा नहीं था जो रावण को नजर आते थे वो मात्र इमेज थे ,शनि स्वयं अशोक वृक्ष के ऊपर बैठे थे जिस पर हनुमान ने फल फूल खाए थे और तोड़ फोड़ की थी| असोक वृक्ष अशोक वाटिका जिसमे माता सीता को रखा हुआ था ,का अहम् तरु था | उस कल्प वृक्ष की छत्र छाया में बैठी सीता माता आशातीत थी की श्री राम अवश्य आएंगे |शनि सूर्य वंशी है ,और आज सूर्यांश राम  पर विपति थी तो  शेशाशिस सुर्यपुत्र सहायता के लिए  मोजूद थे | जब लक्षमण को शक्ति बाण लगा ,हनुमान को संजीवनी लेने जाना पड़ा ,शर्त ये थी की सूर्य उदय होने से पहले संजीवनी लेकर आना है ,अन्यथा बूटी का परभाव कम हो जायेगा|समय कम था विपति बड़ी थी ,काम भी असं नहीं था ,हनुमान ने अपने गुरु सूर्य देव को याद किया ,कहागुरु देव ,
अपती बड़ी आन पड़ी है,
समय थोडा है ,विघन घडी है,
चुन कार ले औं संजीवन,ये परीक्षा मेरी बड़ी है
गुरु देव,. ठहरे रहियो अपनी ठाणे पे जबjn तक लोट नहीं अत्ता ये शिष्य तुम्हारा |,
स्मरण रहे विपदा में है कोई वंशज तुम्हारा | अस्वस्त थे हनुमत ,नहीं  रुकेंगे आदित्य  अनवरत चलते रहेंगे ,मै जनता हु ,ये गुरु है मेरे ,विषम दिशा में थी गति मेरी ,तब जाकर दीक्षा पाई थी ,सुनकर रुदन मेरे धरती माँ ने करवाद बदली ,शनि ने गिरी को आगे अड़ा दिया ,सघन हुआ तिमिर ,देरी हुए परभाती में | इतने में श्री राम नाम का उद्घोष हुआ ,सुनकर उद्घोष परसन्न सुसैन हुआ |मर्म पर सुसैन ने संजीवनी का लेप किया|
 |हनुमान समुद्र लाँघ कार मंदरु पर्वत पर गये ,समझ नहीं पाए बूटी कैसी है ,सो पहाड़ को ही उठाना चाहा ,पहाड़ ब था ,हालत देख शनि ने अपनी नजरो\ रश्मि शक्ति से पहाड़ का टुकड़ा ही अलग कर दिया और हनुमान एक बड़ा हिस्सा ही उठा लाये |jhhbm

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