सरस्वती और लक्ष्मी महत्व

दिनांक 14.01.2024 
जय माँ सरस्वती 
आज बसंत पंचमी है , बड़ा पवित्र दिन ,माता सरस्वती का पूजन दिवस |कार्तिक माह की अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है ,बसंत पंचमी को माता सरस्वती की | कहते है कि माता सरस्वती और लक्ष्मी दोनों सगी बहने है ,परन्तु कभी साथ साथ नहीं रहती| |जब चलती है तो यह सबसे बड़ी युति मानी जाती है |वैसे तो दोनों ही महलक्ष्मी का रूप है |लक्ष्मी के दो रूप है ,लक्ष्मी और सरस्वती| समझे तो जैसे धन लक्ष्मी ,विद्या लक्ष्मी | सत रूपा लक्ष्मी स्थिर रहती है ,जिस पर प्रसन्न हो जाए तो चिरावाधि तक ठहरती है| लक्ष्मी कृपा से प्राप्त धन राशि को बचाए रखने और उसके सदोपयोग को बनाये रखने के लिए समझदार अकाउंटेंट्स की जरुरत है ,एम् बी ए पास मैनेजर चाहिये |कभी पैसा होता नहीं ,कभी होता है तो उचित उपयोग के अभाव में लुट जाता है| डॉक्टर पैसे के बल पर हॉस्पिटल खोल सकता है मगर असली ज्ञान तत्व वाला ही मरीज को ठीक कर पता है | कोटे से बने इंजिनियरके पुल तो गिरते ही है |अतः लक्ष्मी और सरस्वती का साथ होना बहुत जरुरी है| 
ज्ञान का अंतिम लक्ष्य शांति की तलाश होना चाहिये | यदि ज्ञान  का प्रयोग विनाश कारी  हथियार बनाने में होता है तो वो राक्षसी प्रवर्ती यानी रावण कहलायेगा |जो ज्ञान शांति की तलाश यानी सीता की तलाश में लगेगा वो हनुमान कहलायेगा| हनुमान जी खुद बड़े ज्ञान वान---ज्ञानी नाम अग्रगन्यम है ,उन्होंने सीता की तलाश की ,अपने ज्ञान को शांति की तलाश में लगाया जबकि रावण ने अपना ज्ञान धन दोलत इकठठा करने और घमंड में चूर होकर शांति को चुराने में लगाया जो विनाश का ही कारण बना |जिस प्रकार यूरोप के देश गोला बारूद ,टॉप तलवार एटम बनाने में लगे है वो विनाश का ही  कारण है ,ये न केवल भोतिक संसाधन का खात्मा कर रहे है बल्कि प्रकृति का भी विनाश कर रहे है|जब प्रकृति का नाश होता है तो वक्त आने पर कुदरत खुद अपना फैसला करती है तब मनुष्य का विज्ञान धरा का धरा रह जाता है |अतः ज्ञान का प्रयोग मानव कल्याण और शांति के लिए होना चाहिये |
 हनुमान जी  सूर्य नारायण के शिष्य थे ,बड़ी तपस्या करके सूर्य देवता से शिक्षा ली थी | हनुमान शिव के ग्यारवें रुपअवतार  थे और श्री हरी विष्णु के सातवे अवतार श्री राम जी के परम सेवक थे |भक्ति और शक्ति का अजूबा गठन थे | वो आज भी  हर जगह  हवा में मौजूद है ,उनकी उपस्थिति का  एह्सास  है ,हनुमान हवा में मोजूद आक्शिजन है जिसके बना जीवन संभव नहीं |अतः हनुमान जीवन है| हनुमान न केवल रामायण में लक्षमण  के लिए संजीवनी लाये बल्कि वो समस्त प्राणियों  के लिए  वनस्पति के रूप में जीवन दायिनी ऑक्सीजन लाये ,अतः हमें हनुमान की बात मानते हुए अधिकाधिक पेड़ लगाने चाहिये |  
                                                                                                                              क्रमशः

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