Lets save our tiny planet
आओ अपनी धरती को तबाही से बचाए
इसी वर्ष की बात करे तो देखेगे की अप्रैल से जुलाई तक इतनी भीषण गर्मी पड़ी थी कि तापमान 48 से 52 डिग्री तक नोट किया गया | छतो पर टंकियो में पानी उबल रहा था | गलती से भी कोई टॉयलेट में यदि घुस जाए तो सारा सामान फूक दे | कोई नहाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था | चलती गाडियों में आग लग रही थी| घरो में वायरिंग ,सड़े जा रही थी बिजली उपकरण बिजली की आँख मिचोनी से ख़राब हो रहा थे | कोई जरा सोचे की ये हालत क्यों हो गये |वैज्ञानिक सन 70 से पर्यावरण की दुर्दशा के बारे में चिल्लाने लगे थे आने वाले वक्त के बारे में चेताने लगे मगर सरकारे थी किअपनी राजनैतिक गर्मी बनाये रखने के सिवाय किसी को परवाह ही नहीं थी | परवाह तो आज भी किसी को नहीं है .विदेशो के साथ एजेंडों पर सिग्नेचर तो जरुर किये जाते है पर होता कुछ नहीं है |विश्व के धनाडय देश विकासशील देशो को दोष देते है जबकि कार्बन और रेडिएशन के विकिरण सबसे ज्यादा वो खुद करते है | सरकारे भी अकेले नहीं कर पायेगी ,इसके लिए आम आदमी को भी स्वयम आगे आना पड़ेगा ,वर्ना आने वाले पञ्च वर्षो में हालत ये हो जाएगी की चलते चलते लोगो में गर्मी के प्रकोप से शरीर में आग लग जाएगी ,लोग चक्कर खा कर गिर जायेंगे |चलती गाडियों में आग लगेगी जैसे जंगल में आग लगती है | पानी बिलकुल नहीं होगा | हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाएगी |शरीर में ब्लड की सप्लाई कम और हिमोग्लोबिन रहित गो जाएगी , स्व त ही मौत होने लगेगी
पेट्रोल की गाड़िया , मोटरसायकल अथवा कोई भी वाहन ज्यादा देर धूप में खड़ा हो तो पेट्रोल टंकी का ढक्कन ना खोले अन्यथा बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती हैl
विशेषतः युवा पीढ़ी के बच्चों को जरूर बताएंकि चलते चलते वाहन आग पकड़ लेती है ,टायर फट जाते है |आशय को सपष्ट करता हुआ एक विडियो आपको दिखता हु जो मेरे पास भी है !
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